Monday, December 04, 2006

क्या किसी ने कितने पाकिस्तान कभी पढ़ा?

या क्या कोई वह पढ़ रहा है?

मैं उस के बारे बात करना चातहा हूँ लेकिन अब पढ़ने से सर भर गया है (मुझे ठीक मलुम है कि कोई वह हिन्दी में कभी नहीं कहता है)। एक पन्ना में मैंने कम-से कम दस ऐतिहासिक नाम देखे पहली बार, सारी दुनिया से...

3 Comments:

Anonymous आशीष said...

ग्रेग,
मैने "कितने पाकिस्तान" पढा है। यह एक बेहतरिन उपन्यास है।
नफरत और हिण्सा के इतिहास को एक सबसे अलग दृष्टीकोण से देखता है यह उपन्यास। लेकिन इस उपन्यास का आनंद उठाने के लिये आपके पास भारत के इतिहास और विश्व इतिहास(या मिथक) की जानकारी होना चाहिये।

मिथक : mythological stories

4/12/06 8:40 PM  
Anonymous संजय बेंगाणी said...

कितने पाकिस्तान!?
भैये एक ही पाकिस्तान हैं, जिसे न खुदा पढ़ सकता है ना अमेरीका.
यहाँ तक मजाक था.

इस किताब की काफी प्रसंशा सुनी है, पर पढ़ा नहीं.
आपको मौका मिले तो समिक्षा कर दें.

4/12/06 11:10 PM  
Blogger Manish said...

इसमें कोई शक नहीं कि दुनिया भर में हो रही बेवजह हिंसा और रक्तपात पर ऐतिहासिक पृष्ठभूमि का सहारा लेते हुए कमलेश्वर जी ने एक अलग तरह की रचना देने की कोशिश की है ।
लेकिन मुझे ये कहने में कोई हिचक नहीं कि इस पुस्तक को झेलना हर किसी के वश की बात नहीं है ।
ये पुस्तक चिंतन करने पर विवश तो करती है पर कथा शिल्प की दृष्टि से उबाऊ भी है ।

5/12/06 10:50 AM  

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