मेरे ब्लॉग का नाम
अभी श्रिश ने कहा कि मेरे ब्लॉग का नाम नहीं समझ पया। मैं सोचता हूँ कि श्रिश केवल नहीं है इस सवाल पुछने में। तो मैं समझाने की कोशिश करूँगा।
पहली बात है जब मैंने फ़ैसला किया कि मेरे ब्लोग के नाम को बदल दूँ, तो सोचते-सोचते मुझे कोई अच्छा नाम नहीं सुलझा। लोग कह सकते हैं कि शिर्षक में कुछ नहीं असली मतलब है, लेकिन फीर भी हम सब जानते है कि एक नाम में बहुत ही अर्थ है। मसलन मेरा नाम ग्रेग है और इंडिया में हिन्दी बोलनेवाले थोरे-से मुश्किल से उच्चारण कर पाते हैं (क्रेक? ग्रग? गर्ग?), लेकिन मैं कभी नहीं किसी नया नाम लूँगा जैसे चीनी लोग कभी लेते हैं। मेरा नाम ग्रेग है और वहीं मेरा नाम है, गौरव नहीं होगा :)। मैं भी महसूस करता हूँ कि जब हिन्दुस्तानी लोग बाहर जाते हैं तो अच्छी बात नहीं है कि "समीर" की जगह में समीर अपने-आप को "सैम" कहे। अगर आपका नाम की उच्चारण मुश्किल है तो लोग उच्चारण करने की कोशिश करने से कुछ सिखें, और सबसे ज़रूरी बात मेरेलिए यह है कि "समीर" का नाम में कोई ख़ास मतलब है जो "सैम" में नहीं।
ख़ैर नाम में कुछ मतलब ही हैं। (मसलन मैंने सुना है कि मेरे अपने नाम का मतलब है "रात का चौकिदार" येहूदी में।)
तो मैं कोई ठीक नाम नहीं ईज़ाद कर पा रहा था अपने ब्लॉग के लिए तब एक शाम मैं अपने पंखे को घूर रहा था। मैं अपने पंखे को घूरा करता हूँ जब भी मैं कुछ नहीं कर रहा हूँ, या जब कोई गड़बड़ है (ठीक इस्तेमाल?) या जब कोई अमूर्त चीज़ को ध्यान दे रहा हूँ। तब तो मुझे ध्यान आया कि इस पंखे पर एक नाम छपा हुआ (दुलहन)। अंग्रेज़ी में हम कभी कहते "Eureka!" जब हम ऐसा सांस (लिंग ठीक है? और इस्तेमाल?) लेते हैं। एकाएक मुझे पता चला मेरे ब्लॉग का नाम।
तो शायद अभी हज़ीर है कि इस नाम में कोई ठीक नाम नहीं है इत्तेफ़ाक़ के अलावा। लेकिन यह सही नहीं। एक मतलब हो सकता है कि मैं कोई अजीब और नामाज़ेदार मज़ाक कर रहा हूँ एक मशहूर मोहवरे पर। लेकिन वह आकस्मिक है क्योंकि जब मैंने नाम दिया तो मैं उस के बारे में नहीं सोच रहा था। एक और मतलब है कि मैं मज़ाक कर रहा हूँ कि मैं इतनी गलतियाँ करता हूँ लिंग की। पर वह भी आकस्मिक। पहला मतलब यह है (और वह सच मैं थोरा-सा उदास है) कि मैं सोच रहा था कि जब तक मैं असली दुलहन मिल पाता हूँ, तब तक मेरी केवल साथी यह पंखा होगा!
तो अभी मुझे आशा है कि मेरे ब्लॉग का नाम और साफ़ है। सच में इस लेखने के पहले मेरे लिए भी उसका मतलब इतना साफ़ नहीं था...
अभी श्रिश ने कहा कि मेरे ब्लॉग का नाम नहीं समझ पया। मैं सोचता हूँ कि श्रिश केवल नहीं है इस सवाल पुछने में। तो मैं समझाने की कोशिश करूँगा।
पहली बात है जब मैंने फ़ैसला किया कि मेरे ब्लोग के नाम को बदल दूँ, तो सोचते-सोचते मुझे कोई अच्छा नाम नहीं सुलझा। लोग कह सकते हैं कि शिर्षक में कुछ नहीं असली मतलब है, लेकिन फीर भी हम सब जानते है कि एक नाम में बहुत ही अर्थ है। मसलन मेरा नाम ग्रेग है और इंडिया में हिन्दी बोलनेवाले थोरे-से मुश्किल से उच्चारण कर पाते हैं (क्रेक? ग्रग? गर्ग?), लेकिन मैं कभी नहीं किसी नया नाम लूँगा जैसे चीनी लोग कभी लेते हैं। मेरा नाम ग्रेग है और वहीं मेरा नाम है, गौरव नहीं होगा :)। मैं भी महसूस करता हूँ कि जब हिन्दुस्तानी लोग बाहर जाते हैं तो अच्छी बात नहीं है कि "समीर" की जगह में समीर अपने-आप को "सैम" कहे। अगर आपका नाम की उच्चारण मुश्किल है तो लोग उच्चारण करने की कोशिश करने से कुछ सिखें, और सबसे ज़रूरी बात मेरेलिए यह है कि "समीर" का नाम में कोई ख़ास मतलब है जो "सैम" में नहीं।
ख़ैर नाम में कुछ मतलब ही हैं। (मसलन मैंने सुना है कि मेरे अपने नाम का मतलब है "रात का चौकिदार" येहूदी में।)
तो मैं कोई ठीक नाम नहीं ईज़ाद कर पा रहा था अपने ब्लॉग के लिए तब एक शाम मैं अपने पंखे को घूर रहा था। मैं अपने पंखे को घूरा करता हूँ जब भी मैं कुछ नहीं कर रहा हूँ, या जब कोई गड़बड़ है (ठीक इस्तेमाल?) या जब कोई अमूर्त चीज़ को ध्यान दे रहा हूँ। तब तो मुझे ध्यान आया कि इस पंखे पर एक नाम छपा हुआ (दुलहन)। अंग्रेज़ी में हम कभी कहते "Eureka!" जब हम ऐसा सांस (लिंग ठीक है? और इस्तेमाल?) लेते हैं। एकाएक मुझे पता चला मेरे ब्लॉग का नाम।
तो शायद अभी हज़ीर है कि इस नाम में कोई ठीक नाम नहीं है इत्तेफ़ाक़ के अलावा। लेकिन यह सही नहीं। एक मतलब हो सकता है कि मैं कोई अजीब और नामाज़ेदार मज़ाक कर रहा हूँ एक मशहूर मोहवरे पर। लेकिन वह आकस्मिक है क्योंकि जब मैंने नाम दिया तो मैं उस के बारे में नहीं सोच रहा था। एक और मतलब है कि मैं मज़ाक कर रहा हूँ कि मैं इतनी गलतियाँ करता हूँ लिंग की। पर वह भी आकस्मिक। पहला मतलब यह है (और वह सच मैं थोरा-सा उदास है) कि मैं सोच रहा था कि जब तक मैं असली दुलहन मिल पाता हूँ, तब तक मेरी केवल साथी यह पंखा होगा!
तो अभी मुझे आशा है कि मेरे ब्लॉग का नाम और साफ़ है। सच में इस लेखने के पहले मेरे लिए भी उसका मतलब इतना साफ़ नहीं था...

11 Comments:
वाह ग्रेग जी, आपके ब्लॉग के नाम की कहानी तो बहुत मज़ेदार है।
आपकी लच्छेदार भाषा अच्छी लगी।भाई। वैसे इन सबके बाद ये जानने की प्रबल इच्छा हुई कि आप कौन है और
आपका चिट्ठा क्या है।
पढ़ कर अच्छा लगा। कृपया अपन परिचय भी दें।
अब तक मैं भी यही सोचा करता था कि ऐसा अजिब सा नाम क्यों रखा. फिर सोचा अमेरिका में जिसके पास अपनी दुल्हन नहीं होती उसकी दुल्हन पंखा होता होगा ;) .
:-)
ग्रेग यार आपकी खोपडी बहुत उपर तक चलती है बापु...
लगे रहो.
ग्रेग नाम के लोग अटपटे प्रयोग करने में कुछ ज्यादा ही दिलचस्पी रखते हैं
बडे दिनों बाद आपको पढा ग्रेग । ब्लॉग का नाम मज़ेदार है, लोगों का ध्यान आकर्षित करता है । और हाँ , आपकी भाषा में काफी सुधार हुआ है
Brother..long time, indeed.
I had stopped checking your blog for updates (as there were never any), and suddenly today I got to read a whole lot. A jerky, but still informative, update on what you have been doing after leaving Lucknow.
Sounds fun, for sure. And yes, someone rightly said, your Hindi has improved.
Carry on, then.
Oh, and I will be in India for a month starting December first week. Most of this will be spent in Lucknow and Delhi. Any hopes of bumping into you around Christmas?
आपने मेरी जिज्ञासा शांत कर दी। शुक्रिया !
"समीर" का नाम में कोई ख़ास मतलब है जो "सैम" में नहीं।
--इसीलिये हम अपना नाम समीर ही चला रहें हैं और मैने तो आजतक कनाडा और अमेरिका में किसी को मेरे नाम के उच्चारण में तकलीफ़ उठाते नहीं देखा!! :)
Post a Comment
Links to this post:
Create a Link
<< Home